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U.S. Department of Health and Human Services

Food

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एफ़डीए के इतिहास में खाद्य सुरक्षा सम्बन्धी मील-पत्थरों का एक चित्र

In English 


FDA व्यापक अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिए यह अनुवाद एक सेवा के रूप में प्रदान करता है। हमें आशा है कि आप इस अनुवाद को उपयोगी पायेंगे। हालांकि एजेंसी ने ऐसा अनुवाद पाने का प्रयास किया है जो यथासम्भव अंग्रेज़ी संस्करण जितना ही प्रामाणिक हो, फिर भी हम स्वीकार करते हैं कि अनुवादित संस्करण उतना सटीक, स्पष्ट, या पूर्ण न भी हो जितना कि अंग्रेज़ी संस्करण है। इस दस्तावेज का अधिकारिक संस्करण अंग्रेज़ी संस्करण है।

एक शताब्दी से कुछ अधिक समय पूर्व तक, दवाओं या खाद्य पदार्थों में सम्भाव्य रूप से ख़तरनाक तत्वों से जनता की हिफ़ाज़त करने के लिए कोई संघीय क़ानून या नियम मौजूद नहीं थे.
सन् 1862 में, राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने नये कृषि विभग में काम करने के लिए एक मुख्य रसायन-शास्त्री नियुक्त किया. यह नियुक्ति रसायन ब्यूरो की शुरूआत की प्रतीक थी, जो खाद्य एवं औषध प्रशासन का पूर्ववर्ती था. अन्य मील पत्थर हैं:
 

1880
अमेरिकी कृषि विभाग के मुख्य रसायन-शास्त्री, पीटर कॉलियर, ने खाद्य पदार्थों में मिलावट की अपनी तहक़ीक़ातों के बाद, यह सिफ़ारिश की कि एक राष्ट्रीय खाद्य एवं औषध क़ानून पारित किया जाए. वह बिल तो परास्त हो गया, लेकिन अगले 25 वर्षों के दौरान 100 से भी अधिक खाद्य और औषध बिल संसद में पेश किए गये.

1883
खाद्य परिरक्षकों के रूप में अपरीक्षित रसायनों के इस्तेमाल को ले कर वैज्ञानिकों और उपभोक्ताओं दोनों की बढ़ती चिंताओं से प्रेरित, हार्वी डब्ल्यू वायली मुख्य रसायन-शास्त्री बने. डॉक्टर वायली ने यह तहक़ीक़ात शुरू की क्या ऐसे परिरक्षक खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल किये जाने चाहिये, और वे किन स्तरों पर सुरक्षित हैं. सन् 1902 में संसद से कोष मिलने के बाद, उन्होंने ब्यूरो के खाद्य मिलावट अध्ययनों का विस्तार किया, और इस बात की वकालत की कि उपभोक्ताओं को जानकारी देने और उनकी हिफ़ज़त के लिए एक संघीय क़ानून होना चाहिये.

1906
संसद ने शुद्ध खाद्य एवं औषध विधेयक पारित किया जिसमें ग़लत लेबेल लगे और मिलावटी खाद्य पदार्थों, पेय पदार्थों, और औषधियों के अंतर-राज्यीय वाणिज्य की मनाही कर दी गई. इस क़ानून के प्रेरणा स्रोत थे खाद्य पदार्थों में ज़हरीले परिरक्षकों तथा रंग-सामग्री के इस्तेमाल के दहलाने वाले रहस्योद्घाटन, जिनका समाचार पत्र-पत्रिकाओं ने विवरण छापा और अप्टन सिंकलेयर के उपन्यास “द जंगल” में जिसे चित्रित किया गया.

1907
निर्माता और उपभोक्ताओं के अनुरोध पर प्रथम प्रमाणीकृत रंग नियमावली जारी की गई है जिसमें ऐसे सात रंगों की सूची दी गई जो खाद्य पदार्थों में उपयोग के लिए उपयुक्त पाये गए.

1927
रसायन ब्यूरो दो अलग अलग इकाइयां बन गया: खाद्य एवम् कीटनाशक प्रशासन (नियामक) और रसायन तथा मिट्टी ब्यूरो (अनुसंधान). सन् 1930 में एक कृषि विनियोग विधेयक के तहत नियामक एजेंसी का नाम छोटा करके खाद्य एवं औषध प्रशासन (एफ़डीए) रख दिया गया.

1938
संसद ने संघीय खाद्य, औषध तथा कौस्मेटिक (एफ़डीसी) विधेयक पारित किया (जिसने 1906 के विधेयक का स्थान लिया)

1939
डिब्बा-बंद टमाटर, टमाटर प्यूरे, और टमाटर के पेस्ट के लिए प्रथम खाद्य मानक जारी किये गये.

1949
पहली बार, एफ़डीए ने उद्योग के लिए दिशा-निर्देश प्रकाशित किये, “खाद्य पदर्थों में रसायनों की विषाक्तता के मूल्यांकन के लिए कार्यविधियां” (जो “काली पुस्तक” के नाम से विख्यात हुई)

1952
हर कार्यक्षेत्र जिले में एफ़डीए के उपभोक्ता सलाहकार नियुक्त किये गये.
1954एफ़डीए द्वारा आयातीत ट्यूना मछली का प्रथम बड़े पैमाने पर विकिरण परीक्षण जिसके रेडियोधर्मी होने का संदेह था (प्रशांत क्षेत्र में परमाणु विस्फोटों के बाद)

1958
एफ़डीए ने लगभग 200 ऐसे तत्वों की प्रथम सूची प्रकाशित की जिन्हें सामान्यत: सुरक्षित माना जाता है (जीआरएएस )

1969
एफ़डीए ने दूध, शैलफ़िश, भोजन सेवा, और अंतरराज्यीय यात्रा सुविधाओं के लिए स्वच्छता कार्यक्रमों का संचालन शुरू किया.

1973
डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों से बोट्यूलिज़म फैलने के बाद न्यून-तेज़ाब वाले खाद्य संसाधन नियम जारी किये गये.

1980
शिशु फ़ार्मूला विधेयक ने एफ़डीए के विशेष नियंत्रण स्थापित किये ताकि सुरक्षा और समुचित पौष्टिक मात्रा सुनिश्चित हो.

1990
पौष्टिकता लेबलिंग और शिक्षा विधेयक आदेश देता है कि पैकेज किये गये सभी खाद्य पदार्थों पर पौष्टिकता का लेबल लगा हो और खाद्यों के बारे में स्वास्थ्य संबंधी जो भी दावे किये जायें वे अमेरिका के स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग द्वारा परिभाषित शब्दावली के अनुरूप हों.

1993
एफ़डीए की खाद्य संहिता प्रकाशित की गई ताकि वह उन राज्यीय और स्थानीय एजेंसियों के लिए एक प्रतिमान हो जो भोजन-सेवा, बिक्री और खुदरा खाद्य दुकानों का नियमन करती हैं.

1994
स्वास्थ्य और शिक्षा आहारीय संपूरक विधेयक ने लेबलिंग की विशिष्ट मांगें स्थापित कीं और एफ़डीए को आहारीय संपूरकों के लिए अच्छे उत्पादन नियम जारी करने का अधिकार दिया.

1995
समुद्री-भोज्य एचएसीसीपी (जोखिम विश्लेषण अतिमहत्वपूर्ण नियंत्रण बिंदु) नियमावली ताकि आयातीत समुद्री-भोज्य सहित, मछली और मत्स्य-उत्पादकों का सुरक्षित और साफ़-सुथरा संसाधन सुनिश्चित हो.

1998
रस के बारे में एचएसीसीपी नियम इसके सुरक्षित और स्वच्छतापूर्ण संसाधन और आयात के लिए प्रक्रियाएं उपलब्ध कराता है और जो रस पैस्टराइज़ न किये गये हों उन पर चेतावनी लेबल लगाना अनिवार्य बनाता है.

2000
एफ़डीए यह मांग करता है कि अंडों के डिब्बों पर साबुत अंडों के सुरक्षित रख-रखाव के बारे में बयान होना चाहिये.

2002
सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा और जैविक-आतंकवाद तैयारी एवं प्रतिक्रिया विधेयक ने रिकार्ड रखने, सुविधाओं के पंजीकरण, आयातों की पूर्व-सूचना, और प्रशासनिक अवरोधन सहित कई क्षेत्रों में नया अधिकार उपलब्ध कराया.

2006
खाद्य एलर्जी-कारक लेबलिंग तथा उपभोक्ता संरक्षण विधेयक लागू हुआ जिसमें मांग की गई की आठ एलर्जी-कारक खाद्यों से प्राप्त सभी संघटकों को लेबल में बयान किया जाना चाहिये.

2009
अंडा सुरक्षा (अंतिम) नियम जारी किया गया जिसने उत्पादन से लेकर वितरण तक अंडों में सैल्मोनेला एंटैररिटिडिस पर नियंत्रण रखने की आवश्यकताएं स्थापित कीं.

2010
अंडा सुरक्षा नियम का बड़े उत्पादकों (50,000 से अधिक संस्तर वालों) के लिए जुलाई 2010 में कार्यान्वयन शुरू हुआ; इससे छोटे उत्पादकों के लिए 2012 तक अनुपालन ज़रूरी हो जायेगा.